प्रतीकात्मक तस्वीर.

भोपाल:

मध्य प्रदेश के विदिशा के सिरोंज में कल रात से हो रही तेज बारिश आफत की बारिश बनती नजर आ रही है. देर रात से शुरू हुई तेज बारिश से सड़कें पूरी तरह से जलमग्न हो गई और दुकानों और घरों मे पानी भरने लगा जिसके चलते सारा जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया. घरों के सामने खड़े चार पहिया वाहन भी आधे से ज्यादा डूब गये. तेज बारिश से आसपास के नदी नाले भी उफान पर आ गये और निचली बस्तियों मे पानी भरा गया. सिरोंज एसडीएम अंजली शाह ने बताया कि अथाईखेड़ा गांव में बारिश से मकान गिरने और क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण प्रभावित 2 परिवारों के कुल 9 सदस्यों को शासकीय स्कूल भवन में बनाए गये राहत शिविर में  रुकने की व्यवस्था की गई है. शिविर में रहने वालों के लिए बुनियादी सुविधाओं एवं  खाने का इंतजाम कर दिया गया है.

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वहीं, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने बुधवार को कहा कि अगले तीन-चार दिनों तक पश्चिम और मध्य भारत में भारी वर्षा जारी रहने का पूर्वानुमान है. वहीं देश की आर्थिक राजधानी में भारी से बहुत भारी बारिश होने का पूर्वानुमान व्यक्त करते हुए ‘रेड’ अलर्ट जारी किया गया है. आईएमडी ने महाराष्ट्र के पूर्वी विदर्भ क्षेत्र भंडारा, चंद्रपुर, गढ़चिरौली, यवतमाल समेत इस क्षेत्र के अन्य जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए बताया कि यहां भारी से बहुत भारी बारिश होने का पूर्वानुमान है. हालांकि, मौसम कार्यालय ने कहा है कि उत्तर भारत में 24 घंटे के बाद बारिश में कमी आ सकती है. आईएमडी के अनुसार रेड अलर्ट ‘चेतावनी’ का रूपक है और इसके जारी होने का मतलब है कि अधिकारी ‘स्थिति से निपटने के लिए काम में जुट जाएं.’

आईएमडी के अनुसार उत्तर पश्चिम बंगाल की खाड़ी में चक्रवात जैसी स्थिति बनी हुई है और इसके प्रभाव की वजह से अगले 48 घंटे में उत्तर पश्चिम बंगाल की खाड़ी और आस-पास के इलाकों में हवा का निम्न दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है. ऐसे में विदर्भ क्षेत्र में 21-23 जुलाई के बीच मानसून के सक्रिय रहने की संभावना है.

मौसम विभाग के अधिकारी ने बताया कि पूर्वी विदर्भ के ज्यादातर दूरदराज के इलाके में भारी से भारी बारिश होने का पूर्वानुमान है. नागपुर, विदर्भ क्षेत्र का सबसे बड़ा शहर है और यहां शाम पांच बजकर 30 मिनट तक पिछले 24 घंटे में 25.6 मिमी बारिश दर्ज की गई.

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मराठावाड़ा में भारी बारिश की संभावना

मराठावाड़ा क्षेत्र में भी बृहस्पतिवार तक व्यापक बारिश होने की संभावना है और इसके बाद बारिश की तीव्रता कम हो सकती है. मौसम विज्ञान विभाग कार्यालय के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि महाराष्ट्र तथा कर्नाटक के बीच तट पर कम दबाव का क्षेत्र बन रहा है जिससे अक्सर अरब सागर से जमीन पर नमी वाली पश्चिमी हवाएं चलती हैं. उन्होंने बताया कि इसके अलावा महाराष्ट्र में पूर्वी-पश्चिमी पवन प्रणालियां हैं और इससे मानसून के अनुकूल परिस्थितियां बन रही है. अधिकारी ने कहा, ‘‘कोंकण, गोवा और मध्य महाराष्ट्र विशेष तौर पर घाट वाले इलाकों में बहुत भारी बारिश के लिए दो समसामयिक प्रणालियां हैं.



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