BJP की चुनाव आयोग से मांग- ममता बनर्जी को भाषण देने से रोकें, बिगड़ सकता है चुनावी माहौल

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भाजपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से मुलाकात की और आयोग को ममता बनर्जी द्वारा 16 मार्च को बांकुरा में एक रैली में दिए भाषण का एक हिस्सा प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने शाह पर निशाना साधते हुए कहा था, ‘‘चुनाव आयोग को कौन चला रहा है, अमित शाह, क्या आप चुनाव आयोग को चला रहे हैं?” भाजपा ने उल्लेख किया, बनर्जी ने आरोप लगाया था कि वह कोलकाता में बैठकर षड्यंत्र रच रहे थे.

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भाजपा ने बनर्जी के भाषण की और जानकारी साझा करते हुए कहा, ‘‘उपर्युक्त उल्लेखित उदाहरण झूठे, तथ्यहीन, अपमानजनक आरोप के हैं और कानून के किसी आधार या तथ्य के लगाए गए हैं. अमित शाह और भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेताओं की छवि और प्रतिष्ठा को धूमिल करने के लिए एक अभियान चलाया जा रहा है. इसका उद्देश्य गलत सूचना फैलाना और इस तरह से मतदाताओं को गलत तरीके से प्रभावित करना है.”

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भाजपा ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग द्वारा दंडात्मक या सुधारात्मक कार्रवाई के किसी भी डर के अभाव में, राजनीतिक विमर्श और बनर्जी द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली भाषा ने न केवल चुनावी माहौल को खराब कर दिया है, बल्कि तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को मौखिक और शारीरिक हिंसा, दोनों का सहारा लेने के लिए प्रोत्साहित किया है. भाजपा की ओर से कहा गया, ‘‘हम चुनाव आयोग से अनुरोध करते हैं कि वह ममता बनर्जी को आगे भाषण देने से रोकें. उनके वर्तमान और पूर्व के उनके उन व्यवहार के लिए उचित कानूनी कार्रवाई करे, जो कि चुनाव आदर्श संहिता का उल्लंघन करके किया गया है, अन्यथा यह चुनावी माहौल को बिगाड़ सकता है.”

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भाजपा के प्रतिनिधिमंडल में केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी और देबश्री चौधरी के अलावा पार्टी के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र यादव और अनिल बलूनी शामिल थे. प्रतिनिधिमंडल ने आगामी राज्य विधानसभा चुनावों में बूथों के अंदर पीठासीन और मतदान अधिकारियों के साथ केंद्रीय बलों की तैनाती की भी मांग की. भाजपा ने कहा कि उन्हें मतदाताओं के सत्यापन की जिम्मेदारी भी सौंपी जानी चाहिए और मतदान के दिन किसी भी बड़े राजनीतिक हिंसा को नियंत्रित करने के लिए मतदान के दिन गश्त करने का निर्देश दिया जाना चाहिए. भाजपा ने कहा, ‘‘इससे न केवल फर्जी मतदान, राजनीतिक हिंसा को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी बल्कि राजनीतिक कार्यकर्ताओं की हत्या पर भी रोक लगेगी तथा भारतीय निर्वाचन प्रणाली में मतदाताओं का विश्वास भी बढ़ेगा.”

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(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)



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