सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के जाति प्रमाण पत्र रद्द करने के फैसले पर लगाया रोक (फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

महाराष्ट्र के अमरावती से लोकसभा सांसद नवनीत कौर राणा को राहत को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाई है. दरअसल, अमरावती से लोकसभा सांसद नवनीत कौर राणा का जाति प्रमाण पत्र हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है. शिवसेना के पूर्व सांसद आनंदराव अडसुल की अर्जी पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह फैसला दिया था. इसके बाद राणा की लोकसभा सदस्यता खतरे में पड़ गई है. सुप्रीम कोर्ट ने राणा की याचिका पर नोटिस भी जारी किया है. 27 जुलाई को अगली सुनवाई होगी. 

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अमरावती लोकसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी. आनंदराव का आरोप था कि नवनीत कौर राणा ने फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर यहां से लोकसभा का चुनाव जीता था. सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राणा का जाति प्रमाण पत्र गलत पाया है. उन्हें दो लाख रुपए का जुर्माना भरने और छह हफ्ते के भीतर सभी प्रमाण पत्र जमा करने का आदेश दिया गया है. नवनीत राणा के पति रवि राणा महाराष्ट्र के विधायक हैं. 

नवनीत कौर राणा यहां से चुनाव लड़ी थीं और जीत हासिल की थी. आनंदराव का आरोप था कि नवनीत कौर राणा जाली प्रमाण पत्र के आधार पर यहां से लोकसभा चुनाव लड़ीं और जीत हासिल की. 

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि छह हफ्ते के भीतर नवनीत कौर राणा अपने सभी प्रमाण पत्र जमा करें. उच्च न्यायालय ने माना था कि राणा का अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए ‘मोची’ जाति से संबंधित होने का दावा स्वयं धोखाधड़ी था और ऐसा काम उपलब्ध विभिन्न लाभ प्राप्त करने के इरादे से किया गया था, यह जानते हुए भी कि वह उस जाति से संबंधित नहीं है. 

कोर्ट के फैसले के बाद उनकी सदस्यता जाने का भी खतरा दिखाई दे रहा है. नवनीत राणा साल 2014 में राजनीति में एंट्री ली थी. उस दौरान वह एनसीपी के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरी थीं, लेकिन चुनाव हार गई थीं. हालांकि साल 2019 में वह निर्दलीय मैदान में उतरीं और चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचीं. 



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