महाराष्ट्र FDA कमिश्नर का जिलाधिकारियों को पत्र, ‘अस्पतालों में रेमडेसिविर के इस्तेमाल पर नजर रखें’

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देश में अचानक कोरोनावायरस (Coronavirus) के मामले बढ़ने के साथ ही इंजेक्शन का प्रोडक्शन शुरू हुआ है, पर इसके सप्लाई में 15-20 अप्रैल तक का वक्त लगेगा और तब तक इसके इस्तेमाल को नियंत्रण में रखना होगा. लेटर में लिखा है कि जिलाधिकारियों से चर्चा के बाद पता चला है कि निजी अस्पतालों में इसका गैर-जिम्मेदाराना तरीके से इस्तेमाल हो रहा है.

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सरकारी अस्पतालों में रेमडेसिविर का इस्तेमाल तब ही हो रहा है, जब मरीज मॉडरेट से सिवीयर कंडीशन में जा रहा होता है लेकिन निजी में बड़ी संख्या में मरीजों को रेमडेसिविर दी जा रही है. इसकी वजह से रेमडेसिविर की भारी कमी होगी और कालाबाज़ारी बढ़ेगी.

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उदाहरण के तौर पर, 5 जिलों के आंकड़े दिए गए हैं, जिनमें रेमडेसिविर की खपत, सरकारी और निजी अस्पताल में कितनी है, तुलना करते हुए दर्शाया गया है-

नागपुर-

1,526 सरकारी बेड / मरीज, 490 इंजेक्शन रोजाना इस्तेमाल

2,437 निजी अस्पताल बेड / मरीज, 2,598 रेमडेसिविर रोजाना खपत

अकोला- 

239 सरकारी बेड / मरीज,107 रेमडेसिविर रोजाना

311 निजी बेड / मरीज, 268 रेमडेसिविर रोजाना

यवतमाल- 

380 सरकारी बेड / मरीज,123 इंजेक्शन रोजाना खपत

331 निजी बेड / मरीज, 350 इंजेक्शन रोजाना इस्तेमाल

अमरावती- 

232 सरकारी बेड / मरीज, 80 इंजेक्शन रोजाना खपत

493 निजी बेड / मरीज, 500 इंजेक्शन रोजाना

नंदुरबार-

270 सरकारी बेड / मरीज, 200 इंजेक्शन रोजाना

630 निजी बेड / मरीज, 700 रोजाना रेमडेसिविर खपत

निजी अस्पतालों को इसके इस्तेमाल पर कंट्रोल लाना आवश्यक है. सारे जिलाधिकारियों को आदेश दिया गया है कि निजी अस्पतालों में रेमडेसिविर के इस्तेमाल पर नियंत्रण लाएं और फिर भी ज्यादा इस्तेमाल हो रहा हो तो उन अस्पतालों पर कार्रवाई करें.

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