भारत में कोरोना के खिलाफ ‘जंग’ में चिंता का कारण बना ट्रिपल म्‍यूटेशन वेरिएंट..

2


दिल्ली के अस्पतालों में ‘सांसों का आपातकाल’, केंद्र सरकार ने बढ़ाया ऑक्सीजन का कोटा

मैकगिल यूनिवर्सिटी के Epidemiology के प्रोफेसर मधुकर पई कहते हैं, ‘यह वेरिएंट ज्‍यादा संक्रामक है और बड़ी संख्‍या में लोगों को तेजी से बीमार कर रहा है.’ उन्‍होंने कहा, ‘इसके लिए हमें वैक्‍सीन रखनी होगी, इसके लिए पहले हमें डिसीज को समझना होगा. हमें इसकी युद्ध स्‍तर पर सीक्‍वेंसिंग करने की जरूरत है.’भारत के लिहाज से यह बड़ी चुनौती से कम नहीं है जहां इस समय कुल केसों में से महज एक फीसदी जीनोम सीक्‍वेंसिंग की जा रही है. पई के अनुसार, ‘डबल म्‍यूटेंट को पहचानने में हुई देर मौजूदा कोरोना का कारण हो सकती है.’ 

भारत में बनी एक और कोरोना वैक्‍सीन अगस्‍त में होगी उपलब्‍ध : स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय

इतने अधिक म्‍यूटेशन कैसे?

वायरस जितना अधिक फैलता है, उतना ही अधिक यह रिप्‍ल‍िकेट (प्रतिकृति) होता है और अपना रूप बदलता (Mutate) जाता है 

ट्रिपल म्‍यूटेशन क्‍या है?

डबल म्‍यूटेशन भारत में तब पाया गया था जब दो स्‍ट्रेन इकट्ठा हो गए थे. अब तीन कोविड वेरिएंट एक साथ हो गए हैं और ट्रिपल म्‍यूटेशन ‘बना’ लिया है. 

यह म्‍यूटेशन कहां पाया है?

महाराष्‍ट्र, पश्चिम बंगाल और दिल्‍ली.

क्‍या ट्रिपल म्‍यूटेशन संक्रामक है?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह नए केसों को बढ़ा रहा है न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया में. ट्रिपल म्‍यूटेशन कितना संक्रामक है और कितना घातक हो सकता है, यह आगे की स्‍टडी से ही पता चल पाएगा. पूरे भारत में केवल 10 लैब में इस वायरस के बारे में स्‍टडी हो रही है. डबल म्‍यूटेशन ने ट्रांसमिशन (संक्रमण) रेट को बढ़ाया है और इसका असर पर बच्‍चों पर भी दिखा है. अभी तक ट्रिपल म्‍यूटेशन को लेकर अभी स्‍टडी शुरुआती दौर में ही है.

क्‍या मौजूदा वैक्‍सीन ट्रिपल म्‍यूटेशन के खिलाफ कारगर साबित होगी?

ट्रिपल म्‍यूटेशन में तीन में से दो वेरिएंट, जिनकी एंटीबॉडी डेवलप है, उसे कम होने की आसार है. इन पर वैक्‍सीन की प्रभावशीलता के बारे में अभी ज्‍यादा जानकारी नहीं है. 

कोरोना : भारत में कितनी कारगर सिंगल डोज वैक्सीन?



Source link

  •  
  •  
  •  
  •  
  •