कोरोना संक्रमण के खौफ से अस्‍पताल नहीं जा रहे नॉन कोविड मरीज

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प्रतीकात्मक फोटो.

मुंबई:

Mumbai Coronavirus: कोरोना वायरस संक्रमित के मरीजों की संख्‍या बढ़ने के बाद अब अस्‍पतालों में नॉन कोविड मरीजों के लिए इलाज के रास्‍ते बंद होते दिख रहे हैं. हालांकि, गंभीर मरीज़ों का इलाज जारी है पर कई मरीज़ डर से अस्पताल नहीं पहुंच रहे. मुंबई के कैंसर अस्पताल में 60% मरीज़ घट गए हैं. नॉन कोविड मरीज़ों के लिए फिर आफ़त आई है. मुंबई के एज़न कैंसर इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर बताते हैं कि अस्पताल में क़रीब 60% मरीज़ भर्ती नहीं हो पा रहे. 

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एशियन कैंसर इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ संजय शर्मा ने कहा कि ”कोविड की इस लहर में बड़ी सर्जरी, कॉम्प्लिकेटेड ऑपरेशन कम हुए हैं, मरीज़ों का आना कम हुआ है. 50-60% मरीज़ भर्ती नहीं हो पा रहे हैं. ये भयावह स्थिति है. मरीज़ के परिजन डरे हुए हैं. कई लोग आने में सक्षम नहीं हैं. हमारे यहां मरीज कई स्टेट के बाहर से आते हैं लेकिन आने में अभी ट्रेन वगैरह की असुविधा है. निगेटिव रिपोर्ट के बाद भी लोगों को क्वारंटाइन में भेजा जा रहा है, इसलिए इन्हें दिक़्क़त हो रही है.”

चिंता की बात है कि लोगों में पिछले साल जैसा डर फिर घर कर चुका है. संक्रमण के ख़ौफ से नॉन कोविड मरीज़, छोटे रोग के गंभीर होने पर अस्पताल पहुंच रहे हैं. ज़ेन मल्टी स्पेशीऐलिटी हॉस्पिटल के निदेशक गेस्ट्रोइंट्रोलॉजिस्ट डॉ रॉय पाटनकर ने कहा कि ‘’कैंसर रोग के मरीज़ काफ़ी देरी से आ रहे हैं, एक कैंसर पेशेंट महिला जिनको सिर्फ़ लम्प निकालकर ट्रीट कर सकते थे, उन्होंने टेस्ट नहीं करवाया, काफ़ी दिनों से डर की वजह से और गम्भीर हालत में अस्पताल लाई गईं. ऐसे मरीज़ कोविड के डर से ये देरी से आ रहे हैं”

मुंबई शहर के ज़्यादातर अस्पतालों में  इलेक्टिव सर्जरी जैसे की ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी, कैटरैक्ट, वेट लॉस, फ़ेस लिफ़्ट जैसी कास्मेटिक सर्जरी टाली जा चुकी हैं. लेकिन अस्पतालों में गम्भीर नॉन कोविड मरीज़ों का इलाज जारी है. भाटिया हॉस्पिटल के ICU हेड डॉ परेश सावंत ने कहा कि ‘’हमारे नॉन कोविड मरीज़ को हैंडल करने के लिए जो बेड थे, उसको कम करना पड़ा है. म्युनिसिपालिटी और सरकार का ऑर्डर है. बेड घटाए हैं पर जो इमरजेंसी नॉन कोविड है उसको प्राथमिकता दे रहे हैं.”

हाल ही में बीएमसी ने मुंबई के बड़े प्राईवट जसलोक अस्पताल को पूरी तरह से कोविड अस्पताल बनाने की घोषणा की थी लेकिन दूसरी बीमारी वाले गंभीर मरीज़ों की ज़्यादा संख्या देखते हुए निर्णय वापस लेना पड़ा. जसलोक में कोविड और नॉन कोविड दोनों मरीज़ों का इलाज जारी है. 



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