कोरोना के बढ़ते मामलों के बावजूद एक दूसरे को नसीहतें दे रहे हैं बिहार NDA के नेता

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दरअसल, विवाद शुरू हुआ बिहार BJP अध्यक्ष डॉक्टर संजय जायसवाल के फेसबुक पोस्ट से, जो उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा रविवार को राज्य में नाइट कर्फ्यू लगाने के बाद किया था. संजय जायसवाल ने लिखा था, “समझ से परे है कि वायरस दिन में सक्रिय है, तो रात में कर्फ्यू लगाने के बाद कैसे निष्क्रिय हो जाएगा…”

यह फेसबुक पोस्ट JDU के नेताओं को नागवार गुज़रा, क्योंकि यह मुख्यमंत्री पर सीधा हमला था. इसके बाद, बुधवार को नीतीश कुमार की तरफदारी में सबसे पहले राज्य के जल संसाधन मंत्री संजय झा ने कमान संभाली और ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने बताया कि नाइट कर्फ्यू का निर्णय सर्वदलीय बैठक में विचार-विमर्श के बाद ही लिया गया था.

उन्होंने लिखा, “बिहार में #कोरोना पर नियंत्रण के लिए माननीय सीएम श्री @NitishKumar द्वारा जो भी पाबंदियां लगाई गई हैं, उनमें जनहित को सर्वोपरि रखा गया है… फैसले लेने से पहले सर्वदलीय बैठक और उच्चाधिकारियों तथा जिलाधिकारियों के साथ बैठक में घंटों गहन विचार-विमर्श किया गया…”

संजय झा ने इशारे इशारे में साफ कर दिया था कि नीतीश कुमार के फैसले में BJP के उपमुख्यमंत्री और बिहार के स्वास्थ्य मंत्री भी भागीदार हैं, इसलिए अगर कुछ कहा जाना है, तो उन्हें कहा जाए.

लेकिन बात यहीं नहीं रुकी, और इसके बाद हाल ही में JDU में शामिल हुए, और अब संसदीय दल के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने एक अख़बार में प्रकाशित ख़बर पर ट्वीट कर संजय जायसवाल को सलाह दी कि फिलहाल राजनैतिक बयानबाज़ी का वक्त नहीं है.

इसके बाद BJP बचाव के मुद्रा में आ गई और पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, “उपेंद्र कुशवाहा नए मुसलमान हैं, इसलिए प्याज़ ज़्यादा खा रहे हैं…” सम्राट ने कहा कि अगर BJP प्रदेशाध्यक्ष ने जनहित में कोई बात कही है, तो सहयोगी दलों के नेताओं को प्रतिक्रिया देने से बचना चाहिए. साफ है कि अगर JDU को नीतीश कुमार पर हमला बर्दाश्त नहीं है, तो बिहार BJP भी अपने नेताओं के बचाव में किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार है.





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