एन्टीलिया केस में हुए कई अहम खुलासे, सचिन वज़े के पीछे किसका हाथ, यह अब भी मिस्ट्री…?

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यहां तक कि मनसुख की हत्या में कुल कितने लोग शामिल थे और कैसे की गई ये भी NIA या ATS पता करने में नाकामयाब रहे हैं. आलम ये है कि मुख्य मामले से सबका ध्यान हटकर परमबीर सिंह द्वारा तत्कालीन गृहमंत्री अनिल देशमुख और फिर सचिन वज़े द्वारा शिवसेना कोटे से मंत्री अनिल परब पर वसूली का दबाव बनाने पर लगा है. 

बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश पर अब सीबीआई भी मैदान में आ चुकी है औऱ एक दिन में ही परमबीर सिंह सहित, डीसीपी भुजबल, एसीपी संजय पाटिल और NIA की हिरासत में बैठे सचिन वज़े का भी बयान दर्ज कर लिया है. सुशांत सिंह राजपूत संदिग्ध मौत जैसा ये मामला भी अब केंद्र बनाम राज्य सरकार हो चुका है. ऐसे में सवाल है कि मुम्बई पुलिस को शर्मसार करने और राज्य सरकार को संकट में डालने वाली इस साजिश का पूरा सच कभी सामने आएगा या नहीं? 

सट्टेबाज सहित कई लोग NIA की निगरानी में

हैरानी इस बात की भी है कि सचिन वज़े के साथ CIU में काम करने वाले एपीआई रियाज़ काजी, जिन्होंने राज खुलने के बाद वाजे के कहने पर सबूत मिटाने में मदद की उसे और संदिग्ध स्कॉर्पियो कार चलाने वाले ड्राइवर को आज तक गिरफ्तार नहीं किया गया है. संदिग्ध महिला सहित गुजरात के सिम कार्ड देने वाले सट्टेबाज सहित कई लोग NIA की निगरानी में हैं फिर कहानी या गिरफ्तारी आगे क्यों नहीं बढ़ रही है? सबसे बड़ा सवाल है क्या सचिन वज़े बिना किसी बड़े पुलिस अफसर और मंत्री की शह के इतना बड़ा कारनामा कर सकता है? और क्या ये आनन फानन में की गई साजिश थी या महीनों से इसकी तैयारी चल रही थी? 

नवंबर 2020 में हुई थी प्लानिंग! 

जांच से जुड़े कुछ अफसरों से NDTV को मिली जानकारी के मुताबिक, कुछ ऐसे सुराग और सबूत मिले हैं जिससे पता चलता है कि इस साजिश की शुरुआत नवंबर 2020 से ही शुरू हो गई थी, लेकिन अभी तक पूरी कड़ियां जुड़ी नही हैं इसलिए पुख्ता तौर पर कुछ कह पाना मुश्किल है. कड़ियों को जोड़ने की एजेंसी की कोशिश जारी है. जिसकी सबसे पहली कड़ी औरंगाबाद से 17 नवंबर को चुराई गई ईको कार. 28 मार्च को NIA को बीकेसी में मीठी नदी से CPU, DVR, सचिन वज़े का लैपटॉप और प्रिंटर के साथ एक ही नम्बर के दो कार नंबर प्लेट भी मिली थी. पता चला कि वो इको कार की नंबर प्लेट है और और उसे 17 नवंबर को औरंगाबाद से चुराया गया था. 

कार का ठाणे और मुंबई में दिखना संयोग या साजिश?

मीठी नदी से नम्बर प्लेट मिलने के बाद जब उस इको कार की तलाश शुरू हुई तो हैरान कर देने वाली जानकारी मिली. मुम्बई और ठाणे में वही इको कार 4 मार्च की शाम सीसीटीवी में कैद हुई है. गौरतलब है कि 4 मार्च की रात में ही ठाणे में मनसुख हिरेन की हत्या कर दी गई थी. औरंगाबाद से 17 नवंबर 2020 को चुराई कार का नम्बर प्लेट मीठी नदी से एंटीलिया केस से जुड़े सबूतों के साथ मिलना और फिर 4 मार्च की रात मुम्बई और ठाणे में दिखना क्या ये सिर्फ संयोग हो एकता है? अगर नहीं तो ये साफ है कि साजिश की प्लानिंग नवंबर महीने से ही शुरू हो गई थी. 

वसई में हुई थी साजिश की मीटिंग! 

अभी तक गिरफ्तार सचिन वज़े और विनायक शिंदे के मिलने का एक ठिकाना वसई का एक फॉर्महाउस भी है. पता चला है कि  24 फरवरी के बहुत पहले उस मीटिंग में साजिश की पूरी कहानी बनाई गई थी. उस मीटिंग में कुछ और लोग भी शामिल थे जिनका नाम बाहर आना अभी बाकी है. उस मीटिंग के बाद ही गुजरात के फर्जी सिम कार्ड का जुगाड़ लगाया गया ताकि मोबाइल नम्बर से कोई जांच एजेंसी असली आरोपी तक पहुंच ना पाए. फर्जी सिम कार्ड दिलाने वाले ठक्कर नाम के उस सट्टेबाज का बयान भी दर्ज हो चुका है. NIA अदालत में बता चुकी है कि बुकी नरेश गौर के पास से एक चिट मिला है जिसमें 14 मोबाइल फोन नम्बर लिखे थे. उनमें से 5 सिमकार्ड वाजे को दिए गए थे. बाद में उन्ही फोन नंबरों का इस्तेमाल पूरी साजिश को प्लान्ट करने और फिर 4 मार्च की रात मनसुख हिरेन को फोन कर बुलाने के लिए किया गया था. 4 मार्च की रात ही मनसुख हिरन की हत्या कर मुम्ब्रा रेती बंदर में फेंक दिया गया था. 

मुम्बई के नाना चौक से एक्टिवेट किये गए थे गुजरात के 5 सिमकार्ड

जांच में इस बात की जानकारी मिली है कि सभी 5 मोबाइल फोन नम्बर नाना चौक इलाके से एक्टिवेट किये गए थे. एजेंसी ने उस मोबाइल फोन को भी बरामद कर लिया है जिससे गुजरात के सभी सिम कार्ड एक्टिवेट किये गए थे. 3 मार्च को उसी सिमकार्ड में से एक का लोकेशन अंधेरी में मिला है. जिसकी वजह से पूर्व एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा से लगातार दो दिन घंटो पूछताछ हो चुकी है. पता चला है कि स्कोर्पियो कहाँ पार करनी है विनायक शिंदे ने एक दो दिन पहले जाकर रेकी की थी. विनायक शिंदे प्रदीप शर्मा का करीबी रह चुका है. 

2 लोगों के एनकाउंटर की थी योजना

NIA हिरासत में 26 दिन से पड़े सचिन वज़े ने एक और सनसनीखेज खुलासा किया है. एजेंसी सूत्रों के मुताबिक वाजे ने बताया है कि आतंकी साजिश प्लांट करने के बाद जांच को रफा दफा करने के लिए 2 लोगों के एनकाउंटर की योजना थी. उसके लिये 2 व्यक्तियों की पहचान भी कर ली गई थी. 

अति आत्मविश्वास भारी पड़ा

एपीआई सचिन वज़े के अति आत्मविश्वास और ATS के DIG शिवदीप लांडे से बदतमीजी ने पूरा खेल खराब कर दिया. गौरतलब है कि 25  फरवरी की रात को ही ATS ने स्कोर्पियो के मालिक मनसूख की पहचान कर वाजे के फर्जी खेल की पोल खोल दी थी.  

वीडियो: एंटीलिया केस में सचिन वाजे का एक और मंत्री पर वसूली करने का आरोप



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